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रक्षा सौदों में कैग को आई घोटाले की बू गोर्शकोव के दाम ही नहीं, काम को लेकर भी कैग ने सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट कहती है कि जब यह पोत भारतीय नौसेना में शामिल होगा, तब भी इसमें ऐसी कई खामियां होंगी
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नई दिल्ली यूपी खबर बीते एक दशक के दो सबसे बड़े रक्षा सौदों में भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी-कैग) को घोटाले की बू आई है। कैग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में रूसी विमानवाहक पोत गोर्शकोव और स्कार्पियन खरीद सौदों को घोटाले का नाम भले न दिया हो, लेकिन इशारा घपले की ओर ही है। कैग ने पहले से विवादित स्कार्पियन सौदे पर भी नए सवाल उठाए हैं। करोड़ों रुपये बहा कर कबाड़ खरीदने को लेकर कैग ने जिस तरह नौसेना को आईना दिखाया है, उससे विवाद का नया बवंडर खड़ा हो जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। गोर्शकोव सौदे पर कैग का कहना है कि एक पुराने विमानवाहक पोत को तय कीमत से दो गुना से भी ज्यादा दाम पर खरीदने का औचित्य समझ पाना कठिन है। अपनी आधी उम्र पूरी कर चुके इस विमानवाहक को जिस कीमत में खरीदा जा रहा है, उससे कहीं कम दाम में नया जहाज लिया जा सकता था। इस संबंध में अतिरिक्त उप महानियंत्रक लेखा परीक्षक ए.के. अवस्थी का कहना था कि इस तरह की मूल्यवृद्धि असामान्य है। इतना ही नहीं, कैग ने इस सौदे में वित्तीय नियंत्रण की अवहेलना पर भी आपत्ति उठाई है। रिपोर्ट के अनुसार भुगतान की शर्तो को भौतिक उत्पादकता से नहीं जोड़ा गया। इसी कारण मरम्मत और रीफिट की अनुबंधित लागत का 66 फीसदी भुगतान हम पहले ही कर चुके हैं, जबकि केवल 35 प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार अनुबंधित 875 मिलियन डालर के मुकाबले 1.82 बिलियन डालर का भुगतान करने जा रही है। गोर्शकोव के दाम ही नहीं, काम को लेकर भी कैग ने सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट कहती है कि जब यह पोत भारतीय नौसेना में शामिल होगा, तब भी इसमें ऐसी कई खामियां होंगी जो किसी भी सामरिक टकराव में भारी पड़ सकती हैं। ऐसी ही कमी है नजदीक से होने वाले वार के खिलाफ रक्षा प्रणाली का अभाव। कैग के अनुसार पोत में क्लोज-इन-वैपन सिस्टम 2017 से पहले नहीं लग पाएगा और तब तक इसके लिए निर्धारित स्थान विमानवाहक में खाली रहेंगे। इसके अलावा पोत में जेट ब्लास्ट डिफ्लैक्टर भी नहीं होगा जो विमानवाहक से उड़ान भरने वाले विमान के पीछे से निकलने वाली आग और गैस से किसी संभावित नुकसान को रोकते हैं। वहीं रोचक बात यह भी है कि जिन लड़ाकू विमानों की तैनाती के लिए पोत तैयार किया जा रहा है, वे विमान 2012 तक यानी जहाजी बेड़े में गोर्शकोव के शुमार होने तक सेना से बाहर कर दिए जाएंगे। कैग की रिपोर्ट में पहले से विवादों में रहे स्कार्पियन पनडुब्बी सौदे पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पनडुब्बी निर्माण में अनाड़ी होने पर भी स्कार्पियन कंपनी के साथ सौदा कर लिया गया। साथ ही, बिना किसी भौतिक प्रमाण के केवल कम्प्यूटर डिजाइन के सहारे ही कंपनी से अनुबंध कर लिया गया।
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