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मीडिया से रूबरू होते हुए श्री शर्मा ने कहा कि अच्छा व मजबूत प्रशासन जनता को मिले। साथ ही विकास की गति तेज हो सके। मंडलायुक्त श्रवण कुमार शर्मा
मेरठ, यूपीखबर सवांददाता मेरठ मंडलायुक्त श्रवण कुमार शर्मा ने बुधवार रात कार्यभार ग्रहण कर लिया। श्री शर्मा ने कहा कि मेरठ मंडल के विकास को गति और सुदृढ़ प्रशासन देना उनकी प्राथमिकता होगी। आगरा से स्थानांतरित ह ...  औंर…

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जम्मू पुलिसकर्मियों ने बर्बरता की सभी सीमाएं पार कीं ?


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अंतरराष्ट्रीय समाचार - विस्तार में  
 
कर्नाटक के पर्यटन मंत्री जी. जनार्दन रेड्डी ने गत गुरुवार को 45 करोड़ रुपये का मुकुट तिरुपति बालाजी को समर्पित किया है।
तिरुपति स्थिति बालाजी मंदिर इन दिनों एक भक्त द्वारा भगवान को दिए गए कीमती भेंट के चलते चर्चा में है। कर्नाटक के पर्यटन मंत्री जी. जनार्दन रेड्डी ने गत गुरुवार को 45 करोड़ रुपये का मुकुट तिरुपति बालाजी को समर्पित किया है। लेकिन भगवान वेंकटेश के खजाने को देखते हुए इस मुकुट का मोल कोई ज्यादा नहीं है। एक आकलन के मुताबिक भगवान वेंकटेश को जो अब तक चढ़ावा चढ़ा है, वह करीब 30 से 50 हजार करोड़ रुपये मूल्य का है। उनके खजाने की रखवाली में हमेशा हथियारों से लैस सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। रेड्डी से पहले भी बालाजी के छह भक्त उन्हें कीमती मुकुट सौंप चुके हैं। श्रीवेंकटेश्वर हैचरीज के मालिक ने 13 किलो सोने का मुकुट चढ़ाया था। एक और उद्योगपति ने 10 किलो सोने का मुकुट चढ़ाया था। वर्ष 2001 में पुणे के एक उद्योगपति ने शुद्ध सोने का 14.3 किलो का मुकुट चढ़ाया था, जिसका मूल्य करीब एक करोड़ रुपये था। सोना और हीरा जडि़त चढ़ावा तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के खजाने में नियमित रूप से चढ़ते रहते हैं। पिछले कुछ सालों में ऐसे चढ़ावे कुछ ज्यादा ही आ रहे हैं। इनमें सोने का तोता से लेकर सुनहरी झींगा मछली तक हैं। वर्ष 2005 में तमिलनाडु के एक व्यवसायी ने एक कीमती सुनहरा मुकुट भेंट किया। इसमें कीमती अमेरिकी डायमंड जड़े हुए थे। वर्ष 2006 में भगवान वेंकटेश्वर को सबसे कीमती कुंडल (कर्णाभरानालु) चढ़ाया गया। इसे चेन्नई के एक भक्त अलगप्पा चेतियार ने चढ़ाया था। हीरों जडि़त इस गहने का मूल्य 1.01 करोड़ रुपये के करीब था। उन्होंने 50 लाख से अधिक की सोने की चेन देवी पद्मावती को भी भेंट की। अप्रैल 2009 में जब विश्व आर्थिक मंदी के कारण परेशान था, तब एक सीमेंट कंपनी के मालिक ने भगवान वेंकटेश को 5 करोड़ रुपये का दस्ताना, कटि और वरद हस्तम भेंट किया। पुणे के एक व्यापारी ने हीरा जडि़त तोता और नागाभरणम् चढ़ाया जिसका मूल्य 1.5 करोड़ है। तीन साल पहले यूबी ग्रुप के अध्यक्ष विजय माल्या ने मंदिर पर सोने की परत चढ़ाने के लिए सात करोड़ रुपये दिए। पिछले साल जब सोने की कीमत आसमान छू रही थी तब हैदराबाद के एक व्यवसायी राजेंद्रन ने 1.7 करोड़ रुपये का लक्ष्मी हरम (सोने के सिक्कों का हार) चढ़ाया। बेंगलूर के एक अन्य व्यवसायी ने देवी पद्मावती को करीब एक करोड़ का हीरा जडि़त हार चढ़ाया। इतना ही नहीं इसके अलावा ढेरों छोटे-छोटे चढ़ावे चढ़े। सोने की चेन जैसे छोटे मोटे चढ़ावे मुंबई भेज दिए जाते हैं और वहां से उन्हें गला कर सिर्फ शुद्ध सोना मंगाया जाता है और उसे मंदिर के खजाने में जमा कर दिया जाता है। भगवान को चढ़ावे में चढ़ीं कुछ चीजें तो बहुत ही पुरानी और महत्वपूर्ण हैं।
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Wednesday,Wednesday, September 08, 2010
 
 
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