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मीडिया से रूबरू होते हुए श्री शर्मा ने कहा कि अच्छा व मजबूत प्रशासन जनता को मिले। साथ ही विकास की गति तेज हो सके। मंडलायुक्त श्रवण कुमार शर्मा
मेरठ, यूपीखबर सवांददाता मेरठ मंडलायुक्त श्रवण कुमार शर्मा ने बुधवार रात कार्यभार ग्रहण कर लिया। श्री शर्मा ने कहा कि मेरठ मंडल के विकास को गति और सुदृढ़ प्रशासन देना उनकी प्राथमिकता होगी। आगरा से स्थानांतरित ह ...  औंर…

 आज का सवाल
जम्मू पुलिसकर्मियों ने बर्बरता की सभी सीमाएं पार कीं ?


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मुख्य समाचार - विस्तार में  
 
तबादलों का अधिकार मुख्यालय को दिये जाने के फैसले से पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह संतुष्ट नहीं हैं।
प्रदेश शासन के निरीक्षक (इंस्पेक्टर) एवं उपनिरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) के तबादलों का अधिकार मुख्यालय को दिये जाने के फैसले से पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह संतुष्ट नहीं हैं। वह चाहते हैं कि परिक्षेत्र में निरीक्षक व उप निरीक्षकों को एक जिले से दूसरे जिले में तबादला करने का अधिकार फिर से पुलिस महानिरीक्षक एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक को दिया जाये। जबकि गृह विभाग के अफसर डीजीपी के इस विचार से सहमत नहीं हो रहे हैं। ऐसे में डीजीपी ने इस प्रकरण पर सरकार के शीर्ष स्तर के अधिकारियों के कार्रवाई करने का आग्रह किया है। बीते दो वर्ष में यह पहला मौका है जब डीजीपी के स्तर से गृह विभाग के किसी फैसले पर उंगली उठायी है। गौरतलब है सरकार ने सात फरवरी को एक आदेश जारी करके परिक्षेत्र में निरीक्षक एवं उपनिरीक्षक का एक जिले से दूसरे जिले में तबादला किये जाने का अधिकार आईजी एवं डीआईजी से लेकर उसे मुख्यालय को दिये जाने का निर्णय लिया था। निरीक्षक वं उपनिरीक्षक के तबादला किये जाने का फैसला डीजीपी कार्यालय से किये जाने लगे। व्यवस्था लागू होने पर कई जिलों से डीजीपी को यह सूचना मिली कि थानों में तैनात पुलिस के निरीक्षक व उपनिरीक्षक आईजी व डीआईजी के आदेशों की अनदेखी की है। आईजी व डीआईजी के निर्देशों को किनारे रखकर कार्य किया और यह करते हुए उन्हें यह भय नहीं रहा कि गलती करने तथा वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश न मानने पर आईजी और डीआईजी उनका तबादला कर देंगे। पुलिसकर्मियों की इस कार्य प्रणाली को डीजीपी ने खतरनाक माना और उन्हें लगा कि यदि समय रहते इस मामले में कदम नहीं उठाया गये तो तो करीब 1430 थानों में कार्य कर रहे लगभग करीब दो हजार निरीक्षक और 11248 उपनिरीक्षक मनमानी करेंगे। ऐसे में उन्होंने पत्रांक संख्या-डीजी/ चार-106 (3)09 से शासन को एक प्रस्ताव भेजा है। जिसमें उन्होंने सात फरवरी को जारी सरकार के उस आदेश को बदलकर पुरानी व्यवस्था को लागू करने की सलाह दी। डीजीपी के प्रस्ताव पर गृह विभाग के अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया। जिस पर उन्होंने कुछ दिनों फिर से पूर्व शासन के उच्चाधिकारियों को एक पत्र भेजकर कहा कि पुलिस के कार्य एवं व्यवस्था में सुधार के लिए निरीक्षक व उपनिरीक्षक के तबादले का अधिकार फिर से आईजी एवं डीआईजी को दिया जाना बेहतर होगा क्योंकि नयी व्यवस्था व्यवहारिक नहीं सिद्ध हो रही है। डीजीपी के इस पत्र पर भी अभी तक गृह विभाग के स्तर से कोई भी निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में वह अब इस प्रकरण को सरकार के शीर्ष स्तर पर ले जाने में जुट गये हैं।
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Wednesday,Wednesday, September 08, 2010
 
 
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