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मीडिया से रूबरू होते हुए श्री शर्मा ने कहा कि अच्छा व मजबूत प्रशासन जनता को मिले। साथ ही विकास की गति तेज हो सके। मंडलायुक्त श्रवण कुमार शर्मा
मेरठ, यूपीखबर सवांददाता मेरठ मंडलायुक्त श्रवण कुमार शर्मा ने बुधवार रात कार्यभार ग्रहण कर लिया। श्री शर्मा ने कहा कि मेरठ मंडल के विकास को गति और सुदृढ़ प्रशासन देना उनकी प्राथमिकता होगी। आगरा से स्थानांतरित ह ...  औंर…

 आज का सवाल
जम्मू पुलिसकर्मियों ने बर्बरता की सभी सीमाएं पार कीं ?


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लेखक फिचस॔  
 
आरुषि कांड जैसे कई मामलों से बाकी है पर
यूपीखबर नोएडा में एक आरुषि की हत्या हुई तो पूरे देश में बंवडर सा मच गया। क्या समाचार पत्र, क्या टीवी चैनल सभी जगह सिर्फ एक खबर कई दिन तक चली। लेकिन इसी जनपद से सटा गाजियाबाद ऐसा महानगर है, जहां पिछले डेढ़ वर्ष में आरुषि हत्याकांड से मिलते-जुलते कई कांड हुए। जिन्हें न तो आज तक मीडिया ने गंभीरता से लिया और न ही पुलिस ने। इनमें से कई कांड से अभी पर्दा उठना बाकी है। छह जनवरी 2007 को लोनी में सोलह वर्षीय सुमन उर्फ गुड्डी की फांसी देकर हत्या कर दी गई थी। जांच में पुलिस इस नतीजे पर पहुंची थी कि खेखड़ा निवासी शौकीन की पुत्री सुमन की हत्या यहां लाकर की गई थी। पड़ताल में पुलिस इस नतीजे पर पहुंची थी कि सुमन की हत्या उसके किसी करीबी व्यक्ति ने की थी। पुलिस ने यह आशंका भी जताई थी कि सुमन के पिता की किसी व्यक्ति से दुश्मनी चल रही थी। जिसके चलते उसकी हत्या की गई। लेकिन पुलिस आज तक इस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी कि सुमन का हत्यारा कौन था। इस कांड के चंद रोज बाद ही लोनी के बेहटा हाजीपुर में सोलह वर्षीय सपना नामक लड़की का शव मिला था। मसूरी निवासी असगर की पुत्री सपना की हत्या अपहरण के बाद की गई थी। सपना की मौत के मामले में भी पुलिस का अनुमान यही था कि उसकी हत्या किसी नजदीकी ने की है। लेकिन डेढ़ साल बाद भी पुलिस सपना की मौत का खुलासा नहीं कर सकी। सात जनवरी 2007 को लिंक रोड थाना क्षेत्र के झंडापुर इलाके में शीला देवी, उनके ढाई वर्षीय बेटे ईशू व पति वेद पाल की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। तीनों की हत्या एक ही तरीके से की गई थी। हत्यारों ने ढाई वर्ष के बालक की जिस नृशंस तरीके से हत्या की थी, उससे प्रतीत होता था कि हत्यारे पेशवर थे। यह भी आशंका जताई गई थी कि हत्यारे भाड़े पर बुलाए गए थे। इस हत्याकांड का खुलासा नहीं हो सका। 20 मई 2007 को विजय नगर थाना क्षेत्र के चिपियाना गांव में कृष्णा नामक महिला की हत्या कर दी गई थी। कृष्णा को हत्यारों ने गोली भी मारी थी। पड़ताल में खुलासा हुआ था कि कृष्णा की हत्या किसी नजदीकी ने की है। कृष्णा की हत्या से कुछ साल पहले उसके पति की भी इसी तरह हत्या की गई थी। 11 जुलाई 2007 को कवि नगर थाना क्षेत्र के गोविंद पुरम इलाके में ऋतु उर्फ राजबाला की उसके घर में गला रेतकर हत्या कर दी गयी थी। पड़ताल में पाया गया था कि हत्यारा बिना प्रतिरोध के घर के भीतर दाखिल हुआ था। पुलिस भी इस नतीजे पर पहुंची थी कि हत्या किसी नजदीकी द्वारा ही की गयी है। घटना के बाद से उसके पति के फरार हो जाने व अब तक लौट कर न आने पर पुलिस ने भी यह मान लिया कि ऋतु की हत्या उसके पति ने की थी। लेकिन पुलिस अब तक ऋतु की हत्या का राज उजागर नहीं कर सकी। 27 जुलाई 2007 को इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में पंद्रह वर्षीय नसीमा की हत्या कर दी गई थी। न्याय खंड द्वितीय निवासी इंजहार हुसैन की पुत्री नसीमा की हत्या के मामले में भी पुलिस इस नतीजे पर पहुंची थी कि उसकी हत्या किसी नजदीकी व्यक्ति ने की थी। 3 सितंबर 2007 को विजय नगर थाना क्षेत्र राहुल विहार कालोनी में चेतन प्रकाश की उन्नीस वर्षीय पुत्री की घर में ही गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। शादीशुदा प्रिया अपने पिता के घर में ही रह रही थी। पड़ताल में पुलिस इस नतीजे पर पहुंची थी कि प्रिया की हत्या में किसी नजदीकी व्यक्ति का हाथ है। जल्द ही इस बात का खुलासा हो गया था कि प्रिया की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उसके सगे बड़े भाई नरेश ने की थी। 12 सितंबर 2007 को लोनी के लक्ष्मी गार्डन इलाके में सलमा नामक महिला की हत्या का मामला सामने आया था।
 
लघु सिंचाई राज्यमंत्री लखीराम नागर और विधायक योगेश वर्मा के सामने भी इस विवाद पर बबाल उठा था
दांदूपुर निवासी बालिका की गला रेतकर हत्या किए जाने की घटना का दो दिन बाद भी पुलिस खुलासा नहीं कर सकी है। हालांकि पुलिस आधा दर्जन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। गौरतलब है कि ग्राम दांदूपुर निवासी यजुवीर पुत्र ब्रहम सिंह की 12 वर्षीय पुत्री सोनिया गत गुरुवार को ग्राम रहावती से लापता हो गई थी और बाद में उसका हत्या कर फेंका गया शव शुक्रवार सुबह रहावती गांव के जंगल में पड़ा मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके साथ दुष्कर्म होने की भी पुष्टि हुई थी। मृतका के चाचा पिंकू ने दर्ज रिपोर्ट में रहावती निवासी आकाश पुत्र राजवीर पर हत्या का आरोप लगाया था। इस पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। इसको लेकर शनिवार को ग्रामीणों ने जमकर हंगामा भी काटा था। उस दौरान शीघ्र खुलासे का आश्वासन दिया गया था, लेकिन तीसरे दिन भी पुलिस किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। उधर, इस बावत पूछने पर सीओ मवाना दुर्गेश कुमार ने कहा कि बालिका की हत्या के मामले में कुछ युवकों में हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। शीघ्र ही घटना का पर्दाफाश कर दिया जाएगा। उधर, एसओ श्रेष्ठपाल सिंह ने भी आरोपियों से पूछताछ किए जाने की बात कही।लघु सिंचाई राज्यमंत्री लखीराम नागर और विधायक योगेश वर्मा के सामने भी इस विवाद पर बबाल उठा था ग्रामिणो ने कहां थारे बस का ना हो तो हम खुद ही निपट लेंगे लघु सिंचाई राज्यमंत्री लखीराम नागर और विधायक योगेश वर्मा ने रविवार को दांदूपुर पहुंचकर दुष्कर्म के बाद मारी गई बालिका के परिजनों को सांत्वना दी। गांव में विधायक को तीन दिन बाद आने के चलते विरोध का सामना करना पड़ा। वहीं ग्रामीणों ने उपस्थित पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से दो टूक शब्दों में कह दिया कि अगर मामला थारे बस की ना हो बताओ, हम खुद ही निपट लेंगे। इस दौरान एसओ बहसूमा को हटाए जाने की भी मांग उठी। रविवार को दांदूपुर पहुंचे लघु सिंचाई मंत्री लखीराम नागर और विधायक विनोद वर्मा ने पीडि़त परिवार को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया। साथ ही कहा कि ग्रामीण संयम से कानूनी लड़ाई लड़ें वे भी उनके साथ है। मंत्री श्री नागर ने परिजनों से कहा कि इस मामले को राजनीति से दूर रखें और समझदार लोगों की राय से पैरवी करें। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि अपराधियों को पनाह देने वाले बख्शे नहीं जाऐंगे। इस दौरान ग्रामीणों ने मंत्री के सामने ही सीओ से मामले की प्रगति पूछी। सीओ मवाना दुर्गेश कुमार ने बताया कि पुलिस ने पुख्ता सबूत जुटा लिए है और शीघ्र ही मामले का पटाक्षेप कर दिया जाएगा। ग्रामीणों ने पुलिस पर आरोपियों के साथ सहानुभूति पूर्वक व्यवहार करने का भी आरोप लगाया। साथ ही विधायक योगेश वर्मा पर दांदूपुर में तीन दिन विलंब से पहुंचने पर रोष प्रकट किया। विधायक ने बताया कि उनके थाने पर पहंुचने से माहौल खराब हो सकता था। उन्होंने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ असामाजिक तत्व महराजगंज में हुई घटना की भांति माहौल खराब करने और उन्हें बदनाम करने की योजना बनाएं हुए थे। विधायक ने कहा कि सोनिया की मौत का उन्हें दुख है और दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई को लेकर वे लगातार अफसरों से संपर्क साधे हुए हैं। इस दौरान ग्रामीणों ने मौजूद एसडीएम अरुण प्रकाश और सीओ दुर्गेश कुमार आदि के सामने पुलिस कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि अगर थारे बस की बात ना हो तो हम खुद ही निपट लेंगे। वे किसी पर निर्भर नहीं है। ग्रामीणों ने आक्रोश जताते मंत्री श्री नागर से शिकायत की कि हवालात में बंद आरोपी मृतका के समाज को गाली बक रहा था। जबकि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। लोगों ने पुलिस पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया।
 
दुष्कर्म पीडि़तों की मदद को 300 करोड़ की दरकार
महिलाओं से दुष्कर्म करने वालों को कानूनी सजा तो मिलेगी ही लेकिन दुष्कर्म की शिकार महिलाओं को आर्थिक मदद का भी रास्ता साफ होता दिख रहा है। सरकार संसद के मानसून सत्र में इसके लिए योजना का ऐलान कर सकती है। दुष्कर्म की शिकार महिलाओं के लिए मोटे तौर पर सालाना 300 करोड़ रुपये की दरकार होगी। हालांकि मदद के साथ ही दुष्कर्म मामलों की सुनवाई एक निश्चित समय सीमा में कराने की जोरदार पैरवी की गई है। दुष्कर्म की शिकार महिलाओं को आर्थिक मदद और पुनर्वास की योजना पर गुरुवार को यहां हुए विचार-विमर्श में गैर-सरकारी संगठनों, पुलिस अफसरों और सरकारी प्रतिनिधियों ने इन मामलों की सुनवाई के लिए समय सीमा तय करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया। गुड़गांव में तैनात डिप्टी पुलिस कमिश्नर अनिल धवन ने तर्क दिया कि दुष्कर्म मामलों में चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी सुनवाई में वर्षों लग जाते हैं। इस अवधि में कई बार पीडि़ता खुद भी पीछे हट जाती है। मामले की विवेचना करने वाले पुलिस अफसर के लिए भी तब तक जांच की बातें पुरानी पड़ चुकी होती हैं। ऐसे में तय समय में सुनवाई से ही पीडि़ता को न्याय दिलाया जा सकता है। इस मौके पर महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेणुका चौधरी ने कहा, महिला से दुष्कर्म का कोई मुआवजा नहीं हो सकता, लिहाजा पीडि़ता की तात्कालिक जरूरतों के मद्देनजर आर्थिक मदद की योजना बनाई गई है। सरकार इसे संसद के मानसून सत्र में लाने का पूरा प्रयास करेगी। मालूम हो कि सुप्रीमकोर्ट के निर्देश के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने दुष्कर्म की शिकार महिलाओं की आर्थिक मदद की योजना बनाई है। इसके तहत शुरुआत में 20 हजार रुपये से लेकर मामला साबित होने पर दो लाख रुपये तक की मदद की सिफारिश की गई है। सूत्रों के मुताबिक आयोग ने मोटे तौर पर सालाना दुष्कर्म के 15 हजार मामलों को माना है, जिसके लिए औसतन तीन सौ करोड़ रुपये के बजट की दरकार होगी। राष्ट्रीय महिला आयोग और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित इस विचार-विमर्श में कई महिला संगठनों व एनजीओ ने मेडिकल जांच व दूसरी दिक्कतों का मामला भी उठाया, लेकिन सभी ने दुष्कर्म की शिकार महिलाओं को आर्थिक मदद की योजना की जबरदस्त पैरवी की।
 
मुंबई में 5 हज़ार केस हर साल 9000 से 10 हज़ार मामले अदालत में आते हैं, तलाक के
पिछले 8 महीनों में दिल्ली में तलाक के कुल मामलों में लगभग 40 केस महिलाओं की ओर से दायर किए गए हैं। पहले इक्का दुक्का औरतें ही तलाक की अर्ज देती थीं। मुकदमों की संख्या के आधार पर कहा जा सकता है कि दिल्ली तलाक की राजधानी बन गई है। हर साल 9000 से 10 हज़ार मामले अदालत में आते हैं। 5 साल पहले इनकी तादाद इससे आधी थी। आज तलाक देने लेने के इच्छुक लोगों में 20-30 की उम्रवालों की संख्या सबसे अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में हर साल तलाक के लगभग 5 हज़ार केस दायर किए जाते हैं। हालांकि मुंबई को दिल्ली के मुकाबले ज्यादा मॉडर्न माना जाता है। सबसे बड़ा कारण वकील और समाज शास्त्री कहते हैं कि तलाक का सबसे बड़ा कारण है वैवाहिक जीवन से अधिक आशाएं और अपेक्षाएं। जाने-माने वकील विनोद दिवाकर के अनुसार, समाज के उच्च वर्ग में सबसे ज्यादा तलाक होते हैं। औरतें पहले पतियों की मोहताज रहती थीं। आज औरतें आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ी हैं। आज पत्नी-पति दोनों की सहन शक्ति कम हो गई है। शादी मां बाप की मर्जी से हो या लव मैरिज, 7 फेरों की गांठ कमजोर पड़ती जा रही है। कई मामलों में तो शादी के 6 महीने बाद ही दोनों तलाक के बारे में सोचना शुरू कर देते हैं। जबकि कुछ साल पहले तलाक को अच्छा नहीं समझा जाता था। बढ़ती आवश्यकताओं के इस युग में हर कोई महत्वाकांक्षी हो गया है। शिक्षा, पद और पैसे से आत्मविश्वास बढ़ता है और अपने पर भरोसा अहम को जन्म देता है। एक बहुराष्ट्रीय कंपनी की अधिकारी शीना सूरी (बदला हुआ नाम) ने बताया: मैं तलाक लेने की सोच रही हूं। 2 साल पहले हमने लव मैरिज की थी। अब साथ रहना मुश्किल हो रहा है। कभी-कभी मुझे ऑफिस में 8 बज जाते हैं। मेरे पति शाम को 6 बजे घर पहुंच जाते हैं। वह चाहते हैं कि 9 बजे तक घर का सारा काम खत्म कर लूं। छोटा परिवार, दुखी परिवार वकील संजय कुमार कहते हैं: संयुक्त परिवार की प्रथा और परंपरा तेजी से समाप्त होती जा रही है। परिवार छोटे होते जा रहे हैं। पति-पत्नी के झगड़े सुलझाने वाला कोई नहीं है। कभी-कभी तो छोटी सी बात बढ़ते-बढ़ते तलाक तक पहुंच जाती है। शक और अविश्वास तलाक का एक और कारण है एक दूसरे पर शक और अविश्वास। पति-पत्नी एक दूसरे पर विश्वास नहीं करते। जासूसी एजेंसियों के पास कई केस आते हैं, जिनमें पति (या पत्नी) दूसरे की गतिविधियों को जानना चाहते हैं। तलाक के कारणों में कुछ और हैं- ससुराल वालों की दखलंदाजी, पति का पत्नी को नौकरी छोड़ने के लिए विवश करना, बात-बात में एक दूसरे की आलोचना करना, एक दूसरे को दोष देते रहना और गड़े मुर्दे उखाड़ते रहना। दिल्ली विश्वविद्यालय से सोशिऔलोजी (समाज शास्त्र) में पीएचडी करने वाली नमिता सिंह की सलाह है कि पति-पत्नी को एक दूसरे की भावनाओं को समझना चाहिए। तू-तू मैं-मैं की स्थिति आने पर एक को संयम से काम लेना चाहिए। सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों को एक दूसरे पर विश्वास करना चाहिए। तलाक के मुकदमों की वकील गीता कपूर कहती हैं: दिल्ली में ज्यादातर लोग बाहर से आकर बसे हैं। दिल्ली की अपनी संस्कृति और संस्कार तो रहे नहीं। बंगलुरु, चेन्नै और छोटे शहरों में आज भी पारिवारिक परंपराएं कायम हैं। बच्चे न हों तो तलाक लेना और भी आसान हो जाता है।
 
गंगा रक्षा मंच जे पी इंडस्ट्रीज के टिहरी बांध और एक्सप्रेस हाइवे के खिलाफ मोर्चा क्यों खोलेगा?
जेपी इंडस्ट्रीज रामदेव के योगग्राम में पैसा लगाता है और गंगा रक्षा का दावा करनेवाले बाबा रामदेव गंगा रक्षा के पांच सूत्रीय मांगों में गंगा एक्सप्रेस हाईवे का जिक्र करना भी भूल जाते हैं. इससे गंगा रक्षा मंच और उद्योगपतियों के अन्तर्सम्बन्धों से हकीकत खुद बखुद सामने आ गई है। वैसे भी गंगा में जो भी उतरेगा उसे कपड़े उतारने पडेंगे। और कपड़े उतरेंगे को बहुत कुछ दिखेगा। दामन पर लगे दाग गंगा बाद में धोएगी पहले तो वह सार्वजनिक होगा। वही बाबा रामदेव के साथ हो रहा है। योग आसनों और प्राणायाम का बाजारु संस्करण उतार कर दुनिया भर में प्रसिद्ध हुए योग गुरु बाबा रामदेव की निगाह गंगा और उसके पानी पर है। बाबा अब गंगा का कचरा साफ करने उतरे हैं। पिछले कुछ वर्षों में बाबा के योग-प्राणायाम से ठीक हुए लाखों बीमार अब उनके भक्त हैं। उनके ही दम पर बाबा राजनीति की शुद्धता की भी बात करते हैं। गंगा के निर्मलीकरण का अभियान उनकी राजनीति का ही हिस्सा दिखाइ दे रहा है। अगर यह उनकी राजनीति है तो उसमें वह सफल हैं। क्योंकि विहिप के प्रभुत्व वाले गंगा रक्षा मंच के बैनर तले केन्द्रीय गृह राज्यमन्त्री श्रीप्रकाश जयसवाल भी आए और उन्होंने बाबा को प्रधानमन्त्री से मिलने का समय भी दिलाया। जहां तक श्रीप्रकाश जयसवाल का गंगा की शुद्धता के लिए चिन्तित होने का प्रश्न है तो चुनावी साल में वह स्वाभाविक था। लेकिन बाबा का सारा क्रिया कलाप उनके तथाकथित राजनैतिक शुद्धतावाद से परे था। पहली बात। बाबा ने गंगा रक्षा मंच के बैनर तले एक हस्ताक्षर अभियान चला रखा है। हस्ताक्षर अभियान गंगा के सवाल पर केन्द्रीय एवं सम्बन्धित राज्य सरकारों के समक्ष प्रस्तुत मांग पत्र के समर्थन में है। मांग क्या है, इस पर गौर फरमाने की जरूरत है। एक- गंगा को राष्ट्रीय नदी / राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए। दो- केन्द्रीय स्तर उच्चाधिकार सम्पन्न गंगा संरक्षण प्राधिकरण गठित किया जाए। तीन- प्रदूषित जल को निर्धारित मानकों के अनुरूप शोधित करने की व्यवस्था सुनिश्चित हो। चार- गन्दे नालों, कल-कारखानों के प्रदूषित जल एवं लावारिस पशुओं के शव आदि को गंगा जी में डालना संज्ञेय अपराध घोषित किया जाए। पांच- टिहरी बांध परियोजना के जो लाभ निर्धारित किए गए थे उनकी उपलब्धि के सम्बन्ध में केन्द्र सरकार एक श्वेत पत्र जारी करे। मांगपत्र की पहली मांग को छोड दिया जाए तो क्या ऐसा नहीं लगता कि यह मांग पत्र राजनीति के सौदागरों और उद्योगपतियों ने बनाया है। मांग दो पर आइए। गंगा संरक्षण प्राधिकरण गठित होगा तो क्या होगा? सिवाय इसके कि विहिप और बाबा के कुछ चेले प्राधिकरण में नामित हो जाएंगे। देष में कितनी ही परियोजनाओं पर न जाने कितने ही प्राधिकरण बने हैं, उनका क्या हाल है? यह देश की जनता से छिपा नहीं है। मांग तीन पर आइए, प्रदूषित जल को मानकों के अनुरुप षोधन की बात है। क्या होगा? यही न कि गंगा किनारे कुछ सीवेज ट्रीटमेण्ट प्लाण्ट और लग जाएंगे। कौन लगाएगा। कोई उद्योगपति, शायद विहिप और बाबा से जुडा हुआ। मांग पांच क्या है? श्वेत पत्र जारी करने की बात। श्वेत पत्र से क्या होगा? सवाल उठता है कि मंच ने, बाबा ने गंगा के अविरल बहाव की बात क्यों नहीं की? क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो भागीरथी पर, गंगा पर बनने वाले बांधों का निर्माण रोकना पडेगा । टिहरी बांधको तोडकर गंगा की धारा को मुक्त करना पडेगा। टिहरी बांध किसने बनाया जे पी इण्डस्ट्रीज ने। जिसके पास गंगा एक्प्रेस हाइवे का भी ठेका है इसलिए मांगपत्र में गंगा एक्सप्रेस हाइवे से सम्बन्धित कोइ बात नहीं है। सवाल है कि क्या गंगा रक्षा मंच और बाबा रामदेव गंगा एक्सप्रेसवे को गंगा के लिए खतरा नहीं मानते। अब अगर लोग गंगा रक्षा मंच और बाबा रामदेव की नीयत पर सवाल न करें तो क्या करें? गोविन्दाचार्य ने तो 17 जून को ही मंच की विश्वसनीयता पर सन्देह व्यक्त कर दिया था, मंच वालों के सामने ही। और खुद को मंच से अलग कर लिया था। लेकिन अब तो लोग भी सन्देह कर रहे हैं। दूसरी बात- मंच की विश्वसनीयता और बाबा की नीयत पर सन्देह पर और भी कारण हैं। 17 जून को जिस गंगा रक्षा मंच का निर्माण किया गया और जिसका ढिंढोरा पीटा गया वह तो आठ साल पुराना है। और इन्हीं बाबा रामदेव का बनाया हुआ है। बाबा रामदेव ने 12 फरवरी सन् 2000 को गंगा रक्षा मंच पता दादूबाग कनखल, हरिद्वार, फोन नं तत्कालीन 414107, 410008 के लेटर पैड पर प्रधानमन्त्री को एक चिट्ठी लिखी थी। चिट्ठी, प्रयाग में गंगा के सवाल पर आन्दोलनरत कुछ सन्तों की गिरफ्तारी के विरोध में था। चिट्ठी में मातृ सदन, हरिद्वार के हवाले से चेतावनी दी गई थी कि उनकी बात नहीं सुनी गई तो मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानन्द प्राण त्याग देंगे। पत्र में नीचे बतौर संयोजक स्वामी रामदेव और सहसंयोजक स्वामी संविदानन्द के हस्ताक्षर थे । तब क्या हुआ मालूम नहीं लेकिन अब फिर से गंगा रक्षा मंच बनाने का ढोंग क्यो ? तीसरी बात- अब तो सन्देह यहां तक पहुंच गया है कि बाबा रामदेव सचमुच गंगा को बचाना चाहते हैं या गंगा के बहाने निशाना कहीं और है। इसका जवाब भी हरिद्वार से ही मिलता है। तारीखों पर ध्यान दीजिए। हरिद्वार में औद्योगिक क्षेत्र में 9 जून को बाबा रामदेव के योगग्राम का शिलान्यास हुआ और 17 जून को गंगा रक्षा मंच का गठन। शिलान्यास करने वाले थे उत्तराखण्ड के मुख्यमन्त्री बी सी खण्डूरी। शिलान्यास पट्ट पर खण्डूरी के अलावा जे पी इण्डस्ट्रीज के मालिक जे पी गौड़, हीरो होण्डा कम्पनी के चेयरमैन वी एन मुंजाल और हरियाणा के प्रमुख उद्योगपति मित्रसेन आर्य का नाम है। साफ जाहिर है कि शिलान्यास पट पर इनका नाम फोकट में तो नहीं होगा. क्योंकि ये न तो कोई समाजसेवी हैं न ही कोई बडे पदवीधारी। क्या यह सवाल नहीं उठता कि बाबा अब खुद यह बताएं की इन उद्योगपतियों की योगग्राम के निर्माण में क्या भूमिका है? अगर जेपी गौड़ से पैसा लेकर योगग्राम बनता है तो फिर भला गंगा रक्षा मंच जे पी इंडस्ट्रीज के टिहरी बांध और एक्सप्रेस हाइवे के खिलाफ मोर्चा क्यों खोलेगा? इतना ही नहीं, सवाल यह भी है कि बाबा रामदेव इन उद्योगपतियों के काले कारनामों को छिपाने की कोषिष तो नहीं कर रहे? बताते चलें कि उत्तराखण्ड की पिछली सरकार में हीरो होण्डा, एवरेडी, सोमानी फोम्स और वी आइ पी इण्डस्ट्रीज को फैक्टरी लगाने की अनुमति नहीं मिली। क्योंकि इन कम्पनियों का खतरनाक रासायनिक कचरा सीधे गंगा में गिरने वाला था। इन कम्पनियों को प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र न देनेवाले अधिकारी वी एस नेगी को सरकार ने स्थानान्तरित कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय के वाद संख्या 6023/2006 से सारी बातें साफ हो जाती हैं। स्थानान्तरण के खिलाफ उत्तराखण्ड उच्चन्यायालय में वाद दाखिल किया। फैसला नेगी के पक्ष में हुआ और राज्य सरकार हार गई। फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की। जहां मुकदमा चल रहा है। अब मुकदमें में अपने आर्थिक हितों का हवाला देकर राज्य सरकार के साथ ये कम्पनियां भी खडीं हैं। शायद यही वजह है कि देश के जाने माने वकील सोली सोराबजी और फाली एस नरीमन समय समय पर राज्य सरकार के पक्ष में खडे होते हैं।
 
 
Wednesday,Wednesday, March 10, 2010
 
 
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